नया पेंट कमरे को बिल्कुल नया बना देता है — लेकिन जल्दबाज़ी में किया गया पेंट धब्बों, लकीरों और बूंदों से भरा दिखता है। प्रो पेंटर और शौक़िया में फ़र्क पेंट की कीमत से नहीं, तैयारी और टेक्नीक से होता है। इस गाइड से आप भी प्रो जैसा फिनिश पा सकते हैं।

तैयारी: आधा काम यहीं होता है

दीवारों को साफ़ करें, पुराने पेंट के छिलके खुरचें और दरारों को पुट्टी से भरकर सुखा लें। तैयारी में बिताया गया हर घंटा फिनिश को दोगुना अच्छा बनाता है — यही प्रो का सबसे बड़ा राज़ है। फर्नीचर को बीच में लाकर प्लास्टिक शीट से ढकें, फर्श पर पुरानी चादर या ड्रॉप क्लॉथ बिछाएं, और स्विच-बोर्ड व किनारों पर पेंटर टेप लगाएं।

सही टूल्स और पेंट चुनें

बड़ी दीवारों के लिए 9 इंच का रोलर, किनारों और कोनों के लिए 2 इंच का ब्रश, और पेंट ट्रे बुनियादी सेट है। पेंट की मात्रा अंदाज़न: एक गैलन (करीब 4 लीटर) पेंट से 35-40 वर्ग मीटर दीवार का एक कोट होता है। रंग चुनते समय दीवार पर छोटा पैच लगाकर दिन और रात की रोशनी में देखें — दुकान की रोशनी में रंग हमेशा अलग दिखता है।

पेंट करने की टेक्नीक

पहले ब्रश से किनारों और कोनों को पेंट करें (इसे "कटिंग इन" कहते हैं), फिर रोलर से दीवार का बीच का हिस्सा। रोलर को W या M आकार में चलाएं, फिर एक दिशा में चिकना करें — रोलर को कभी सूखा न चलाएं, हमेशा गीला किनारा बनाए रखें ताकि धारियां न बनें। एक कोट के बाद कम से कम 4 घंटे सूखने दें, फिर दूसरा कोट लगाएं।

आम गलतियों से बचें

सबसे बड़ी गलती: गीले पेंट पर बार-बार रोलर चलाना — इससे धब्बे बनते हैं। पेंट को कभी पानी में ज़्यादा पतला न करें, और बंद कमरे में पेंट करते समय खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन रखें। टेप को पेंट पूरी तरह सूखने से पहले, लेकिन हाथ लगने लायक सूखने के बाद, 45 डिग्री के कोण पर धीरे से हटाएं। काम खत्म होने पर ब्रश और रोलर तुरंत धो लें — सूखा पेंट फिर काम का नहीं रहता।