सबसे बड़ा चोर: स्क्रीन

फ़ोन की बैटरी का 40-50% हिस्सा अकेली स्क्रीन खा जाती है। ब्राइटनेस को ऑटो पर रखें या मैन्युअल रूप से आधी से कम करें — यही एक बदलाव घंटों का बैकअप बढ़ा देता है। स्क्रीन टाइमआउट 30 सेकंड पर सेट करें और डार्क मोड चालू करें, ख़ासकर अगर आपका फ़ोन OLED डिस्प्ले वाला है।

बैकग्राउंड ऐप्स पर लगाम

सेटिंग्स में बैटरी यूसेज खोलें — आपको हैरानी होगी कि कौन-कौन से ऐप बिना खोले ही बैटरी चूस रहे हैं। जिन ऐप्स की बैकग्राउंड एक्टिविटी ज़रूरी नहीं, उनकी बैकग्राउंड रिफ़्रेश बंद कर दें। सोशल मीडिया ऐप्स को बैकग्राउंड में चलने देने के बजाय ज़रूरत पर खोलना ही बेहतर है।

कनेक्टिविटी: सिर्फ़ ज़रूरत पर

वाई-फ़ाई, ब्लूटूथ, GPS और मोबाइल डेटा जब इस्तेमाल न हो रहा हो, तो बंद रखें। ख़ासकर GPS लोकेशन बैटरी का बड़ा दुश्मन है — सिर्फ़ नेविगेशन ऐप्स को लोकेशन की इजाज़त दें, बाकी सब को नहीं। कमज़ोर सिग्नल वाली जगह में फ़ोन ज़्यादा पावर खाता है, इसलिए वहाँ एयरप्लेन मोड मदद करता है।

चार्जिंग की सही आदतें

बैटरी को 20% से 80% के बीच रखना उसकी उम्र सबसे ज़्यादा बढ़ाता है। रात भर चार्जर पर लगाकर सोना बैटरी को धीरे-धीरे कमज़ोर करता है — ऑप्टिमाइज़्ड चार्जिंग फ़ीचर चालू करें। बहुत गर्म फ़ोन पर गेम खेलना या चार्ज करते समय भारी काम करना बैटरी के लिए सबसे नुक़सानदेह है।

छोटे बदलाव, बड़ा फ़र्क़

नोटिफ़िकेशन सिर्फ़ ज़रूरी ऐप्स तक सीमित करें, लाइव वॉलपेपर हटाएँ, ऑटो-सिंक का अंतराल बढ़ाएँ और बैटरी सेवर मोड को दिन के आख़िरी घंटों में नहीं, दिन की शुरुआत से ही चालू रखें। पुराने फ़ोन में बैटरी हेल्थ 80% से नीचे हो तो बैटरी बदलवाना नया फ़ोन लेने से कहीं सस्ता है।

इन 12 टिप्स में से आधी भी अपना लीं, तो आपका फ़ोन शाम तक आराम से चलेगा — चार्जर ढूँढने की टेंशन हमेशा के लिए ख़त्म।