रोज़ खाना बनाने का समय नहीं और बाहर का खाना जेब पर भारी? मील प्रेप का मतलब है हफ़्ते में एक दिन 2 घंटे खाना बनाकर पूरे हफ़्ते की टेंशन ख़त्म। और यह अमीरों का शौक नहीं — सही प्लानिंग से यह सबसे सस्ता तरीका है।
हफ़्ते की प्लानिंग: 10 मिनट का काम
खरीदारी से पहले कागज़ पर 7 दिन के खाने लिख लें — इससे बेकार सामान नहीं आता और बजट नहीं बिगड़ता। एक ही जैसे सामान से कई डिश बनाएं: चावल, दाल, राजमा, छोले — एक ही किराने से 4-5 तरह के खाने। हफ़्ते में 2-3 रेसिपी ही घुमाएं; रोज़ नया बनाने की कोशिश में थकान और खर्च दोनों बढ़ते हैं।
सस्ते और सेहतमंद स्टेपल सामान
दालें, चना, राजमा, सोयाबीन — प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत। चावल, गेहूं, ओट्स, बाजरा — भरपूर कार्बोहाइड्रेट कम दाम में। मौसमी सब्ज़ियां हमेशा सस्ती और ताज़ा होती हैं; सीज़न के हिसाब से मेन्यू बदलें। अंडे और मूंगफली भी बजट-फ्रेंडली प्रोटीन हैं। मसाले थोक में खरीदें — छोटी डिब्बियों से दोगुना पैसा बचता है।
बैच कुकिंग: एक बार, कई खाने
रविवार को एक साथ 2-3 चीज़ें बनाएं — कुकर में दाल, कड़ाही में सब्ज़ी, साथ में चावल। बेस तैयार रखें: प्याज़-टमाटर का मसाला बड़ी मात्रा में बनाकर फ्रिज़ में रखें, रोज़ सिर्फ़ सब्ज़ी या दाल बदलें। ग्रेवी और दालें 3-4 दिन फ्रिज़ में ठीक रहती हैं, रोटी ताज़ा बना लें। फ्रीज़र का इस्तेमाल करें: पराठे, कबाब और करी हफ़्तों तक चलते हैं।
स्टोरेज के स्मार्ट तरीके
एयरटाइट डिब्बों में लेबल लगाएं — तारीख के साथ, ताकि पुराना खाना पहले ख़त्म हो। ग्लास कंटेनर प्लास्टिक से बेहतर हैं और माइक्रोवेव-सेफ़ भी। गर्म खाना ठंडा करके ही फ्रिज़ में रखें, वरना बैक्टीरिया पनपते हैं। 3 दिन का नियम याद रखें: पका हुआ खाना फ्रिज़ में 3-4 दिन से ज़्यादा न रखें।
शुरुआत छोटी करें: इस हफ़्ते सिर्फ़ लंच प्रेप करके देखें। जब आदत बन जाएगी, तो पैसा, समय और सेहत — तीनों की बचत खुद दिखने लगेगी।