मैग्नीशियम शरीर की 300 से ज़्यादा प्रक्रियाओं में काम आता है — फिर भी ज़्यादातर लोगों को इसकी पर्याप्त मात्रा नहीं मिलती। थकान, खराब नींद और मांसपेशियों में ऐंठन के पीछे अक्सर मैग्नीशियम की कमी होती है। जानिए इस ज़रूरी मिनरल के बारे में सब कुछ।
मैग्नीशियम क्यों ज़रूरी है
यह दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर, हड्डियों की मज़बूती और नर्वस सिस्टम को संतुलित रखता है। शरीर मैग्नीशियम खुद नहीं बनाता — यह सिर्फ खाने से मिलता है। प्रोसेस्ड फूड वाले आहार में इसकी कमी आम है।
बेहतर नींद के लिए
मैग्नीशियम दिमाग़ को शांत करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर को सपोर्ट करता है, जिससे नींद गहरी आती है। सोने से पहले मैग्नीशियम-रिच स्नैक (केला या बादाम) कई लोगों को फायदा पहुँचाता है। यह नींद की गोली नहीं, पर प्राकृतिक सहारा ज़रूर है।
मांसपेशियों और ऐंठन में राहत
रात में पैरों में ऐंठन या एक्सरसाइज़ के बाद खिंचाव — मैग्नीशियम मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करता है। खिलाड़ियों और ज़्यादा पसीना बहाने वालों को इसकी ज़रूरत और बढ़ जाती है।
सबसे अच्छे फूड स्रोत
बादाम, काजू, मूंगफली, पालक, केला, डार्क चॉकलेट, दालें और साबुत अनाज मैग्नीशियम से भरपूर हैं। रोज़ एक मुट्ठी नट्स और हरी सब्ज़ी आपकी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा पूरा कर देते हैं। सप्लीमेंट से पहले खाने से लेने की कोशिश करें।
कमी के लक्षण पहचानें
लगातार थकान, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, मांसपेशियों में ऐंठन और सिरदर्द — ये कमी के संकेत हो सकते हैं। लक्षण दिखें तो अंदाज़े से सप्लीमेंट न लें, पहले डॉक्टर से ब्लड टेस्ट करवाएँ।
सप्लीमेंट: कब और कितना
वयस्कों को रोज़ लगभग 300-400 mg मैग्नीशियम चाहिए। मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट नींद के लिए और साइट्रेट पाचन के लिए बेहतर माना जाता है। ज़्यादा मात्रा से दस्त हो सकते हैं — डॉक्टर की सलाह के बिना हाई डोज़ न लें। किडनी के मरीज़ विशेष सावधानी बरतें।