एक भारतीय परिवार रोज़ करीब 1–2 किलो कचरा निकालता है — और इसका बड़ा हिस्सा रीसाइकल हो सकता है। अच्छी खबर: शुरुआत बहुत आसान है, सिर्फ तीन डिब्बों से।
तीन डिब्बों वाला सिस्टम
- हरा डिब्बा — गीला कचरा: सब्ज़ी के छिलके, बचा खाना, चायपत्ती। इससे कंपोस्ट बनता है।
- नीला डिब्बा — सूखा कचरा: कागज़, गत्ता, प्लास्टिक बोतल, डिब्बे, पुराने कपड़े।
- लाल डिब्बा — हानिकारक कचरा: बैटरी, ट्यूबलाइट, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक कचरा।
कचरा मिलाने से रीसाइकल की पूरी प्रक्रिया बिगड़ जाती है — छाँटना ही सबसे बड़ा योगदान है।
घर पर कंपोस्ट बनाएं
बालकनी में एक मटका या डिब्बा रखें, गीले कचरे में सूखे पत्ते मिलाते जाएं। 6–8 हफ्ते में पौधों के लिए बेहतरीन खाद तैयार! बदबू न आए इसके लिए डिब्बे में छेद रखें और हर 2–3 दिन में कचरा पलटें।
रीयूज़: फेंकने से पहले सोचें
कांच के जार मसालों के डिब्बे बन सकते हैं, पुरानी टी-शर्ट पोछा, और अखबार खिड़की साफ करने के काम। ई-कचरा (पुराने फोन, चार्जर) कबाड़ी को नहीं, अधिकृत ई-वेस्ट सेंटर को दें — कई शहरों में कंपनियां घर से मुफ्त कलेक्शन करती हैं। छोटा बदलाव, बड़ा असर: आपका घर ही बदलाव की शुरुआत है।