रसोई से निकलने वाले छिलके और बचा खाना कचरा नहीं, सोना है — सही तरीके से सड़ाकर यह पौधों के लिए बेहतरीन जैविक खाद बनता है। घर पर कम्पोस्ट बनाने से कचरा आधा होता है और पौधे मुफ़्त में खुश होते हैं। शुरुआत करना बेहद आसान है।
कम्पोस्टिंग क्यों करें
गीला कचरा लैंडफिल में सड़कर मीथेन गैस बनाता है जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है। घर पर कम्पोस्ट करने से आपका कचरा 50% घटता है और रासायनिक खाद की ज़रूरत खत्म होती है। पौधे जैविक खाद में ज़्यादा स्वस्थ बढ़ते हैं।
सही डिब्बा चुनें
बालकनी के लिए छेद वाला प्लास्टिक डिब्बा या मिट्टी का घड़ा काफ़ी है। बाज़ार में तैयार कम्पोस्ट बिन भी मिलते हैं। डिब्बे में हवा के लिए छेद ज़रूरी हैं — बिना हवा के सड़न से बदबू आती है। डिब्बा छाँव वाली जगह रखें।
क्या डालें, क्या नहीं
डालें: सब्ज़ी-फलों के छिलके, चायपत्ती, अंडे के छिलके, सूखे पत्ते, अखबार के टुकड़े। न डालें: पका हुआ तेल-मसालेदार खाना, मांस, डेयरी, प्लास्टिक। गीली (हरी) और सूखी (भूरी) सामग्री का संतुलन ही अच्छी कम्पोस्ट का राज़ है — 1:2 का अनुपात रखें।
परत-दर-परत तरीका
सबसे नीचे सूखे पत्ते, फिर रसोई का कचरा, फिर मिट्टी की पतली परत — ऐसे परतें बनाते जाएँ। हर 4-5 दिन में हल्के से पलटें। नमी केक जैसी होनी चाहिए — न बहुत गीली, न सूखी। 2-3 महीने में काली, मिट्टी जैसी खुशबू वाली खाद तैयार।
बदबू और कीड़ों से बचाव
बदबू का मतलब है ज़्यादा गीलापन या हवा की कमी — सूखे पत्ते या अखबार मिलाएँ और पलटें। कचरे को हमेशा मिट्टी या सूखी परत से ढककर रखें — मक्खियाँ नहीं आएँगी। नींबू-संतरे के छिलके ज़्यादा न डालें, ये प्रक्रिया धीमी करते हैं।
तैयार खाद का इस्तेमाल
जब कम्पोस्ट काली, भुरभुरी और मिट्टी जैसी महके तो तैयार है। गमलों में 1-2 मुट्ठी मिलाएँ या पानी में घोलकर छिड़कें। घर की बनी खाद बाज़ार की खाद से बेहतर होती है — और बिल्कुल मुफ़्त। पौधों की ग्रोथ खुद फर्क बता देगी।