बाढ़, भूकंप, तूफ़ान या लंबा ब्लैकआउट — इमरजेंसी कभी बताकर नहीं आती। आपदा के बाद मदद पहुंचने में अक्सर 2-3 दिन लग जाते हैं, इसलिए हर घर में 72 घंटे (3 दिन) चलने वाली इमरजेंसी किट होनी चाहिए। यह रही पूरी चेकलिस्ट।
पानी और खाना — 3 दिन का हिसाब
हर व्यक्ति के लिए रोज़ 3-4 लीटर पानी रखें (पीने और बुनियादी सफाई के लिए) — सील्ड बोतलें या डिब्बाबंद पानी सबसे सुरक्षित है। खाने में वह रखें जो बिना पकाए खाया जा सके: एनर्जी बार, सूखे मेवे, बिस्किट, डिब्बाबंद खाना। बच्चों और बुज़ुर्गों का खास खाना अलग से रखें। हर 6 महीने में एक्सपायरी डेट चेक करें और पुराना सामान बदल दें — बेकार किट न होने से भी बुरी है।
फर्स्ट-एड और दवाएं
बैंडेज, एंटीसेप्टिक लोशन, दर्द और बुखार की दवा, ORS के पैकेट किट में ज़रूर हों। जो दवाएं रोज़ लेते हैं (बीपी, शुगर, अस्थमा) उनकी 7 दिन की एक्स्ट्रा खुराक अलग थैली में रखें। डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की फोटो फोन में सेव रखें। एलर्जी वालों के लिए एंटी-एलर्जी दवा भी डाल दें।
रोशनी, पावर और रेडियो
टॉर्च के साथ एक्स्ट्रा बैटरी, मोमबत्ती और माचिस (सावधानी से इस्तेमाल करें)। पावर बैंक हमेशा फुल चार्ज करके रखें — फोन ही आपका सबसे बड़ा मददगार है। बैटरी वाला छोटा रेडियो रखें; नेटवर्क ठप होने पर रेडियो ही खबरों का एकमात्र ज़रिया होता है। एक सीटी भी डाल दें — मलबे में फंसे होने पर बचाव दल को सिग्नल देने के काम आती है।
दस्तावेज़ों की कॉपी और सही स्टोरेज
आधार, पैन, पासपोर्ट, बीमा पॉलिसी और बैंक डिटेल की फोटोकॉपी वॉटरप्रूफ थैली में रखें। एक कॉपी फोन या क्लाउड में भी सेव करें। किट को घर के मुख्य दरवाज़े के पास या ऐसी जगह रखें जहां अंधेरे में भी तुरंत मिल जाए — स्टोर रूम की सबसे अंदर वाली अलमारी सबसे खराब जगह है। साल में दो बार (जनवरी और जुलाई) पूरी किट खोलकर चेक करें — यही असली तैयारी है।
इमरजेंसी किट की उम्मीद यही है कि वह कभी काम न आए — पर होनी ज़रूर चाहिए। इस हफ़्ते एक बैग में पानी, टॉर्च और दवाएं रखकर शुरुआत करें; बाकी चीज़ें धीरे-धीरे जोड़ते जाएं।