हमारी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल है — बैंक खाते, फोटो, ईमेल, सोशल मीडिया। पर क्या आपने सोचा है कि आपके बाद इनका क्या होगा? डिजिटल एस्टेट प्लानिंग का मतलब है अपने डिजिटल खातों और फाइलों के लिए पहले से इंतज़ाम करना, ताकि परिवार को परेशानी न हो।

अपनी डिजिटल संपत्ति की लिस्ट बनाएं

पहले लिखें — बैंक और UPI खाते, ईमेल, सोशल मीडिया, क्लाउड फोटो, ऑनलाइन निवेश और सब्सक्रिप्शन। ज़्यादातर लोग भूल जाते हैं कि उनके कितने खाते हैं। यह लिस्ट कागज़ पर या पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फाइल में रखें, और साल में एक बार अपडेट करें।

पासवर्ड और एक्सेस का इंतज़ाम

पासवर्ड मैनेजर इस्तेमाल करें और उसका मास्टर पासवर्ड किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं — या सीलबंद लिफाफे में वकील के पास रखें। Google और Apple में "इनएक्टिव अकाउंट मैनेजर" जैसी सेटिंग है, जिससे तय समय बाद आपका चुना हुआ व्यक्ति एक्सेस पा सकता है। पासवर्ड कभी खुली डायरी या व्हाट्सऐप चैट में न छोड़ें।

वसीयत में डिजिटल क्लॉज़ जोड़ें

अपनी वसीयत में लिखें कि डिजिटल खातों का क्या हो — कौन उन्हें बंद करेगा, कौन संभालेगा। भारत में डिजिटल संपत्ति पर कानून अभी विकसित हो रहा है, इसलिए वसीयत में साफ़ निर्देश वकील से लिखवाना सबसे सुरक्षित तरीका है।

परिवार से बात करें

यह विषय टालने वाला नहीं है — परिवार को बताएं कि ज़रूरी दस्तावेज़ और एक्सेस की जानकारी कहां रखी है। अचानक इमरजेंसी में यही जानकारी सबसे काम आती है। साल में एक बार परिवार के साथ यह जानकारी रिव्यू करें, ताकि सब कुछ अपडेटेड रहे।

सोशल मीडिया अकाउंट्स का फैसला

Facebook में "मेमोरियलाइज़्ड अकाउंट" का विकल्प है और Google में डेटा डिलीट करने का — पहले से तय करें कि आपके अकाउंट बंद हों, यादगार बनें या परिवार को सौंपे जाएं। हर बड़े प्लेटफॉर्म की यह सेटिंग आज ही चेक कर लें, इसमें 10 मिनट से ज़्यादा नहीं लगता।