होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड — हर बड़ी वित्तीय सुविधा की चाबी आपका क्रेडिट स्कोर है। 300 से 900 के बीच यह नंबर बताता है कि आप कर्ज़ चुकाने में कितने भरोसेमंद हैं। 750 से ऊपर का स्कोर रखें — बैंक आपको सस्ती ब्याज दर और तेज़ अप्रूवल दोनों देंगे। अच्छी बात: स्कोर सुधारा जा सकता है।

स्कोर बनता कैसे है, यह समझें

स्कोर में सबसे बड़ा हिस्सा समय पर भुगतान का है, फिर क्रेडिट के इस्तेमाल का अनुपात, फिर क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई। एक भी EMI या कार्ड पेमेंट मिस होना स्कोर को तेजी से गिराता है। समय पर भुगतान ही स्कोर का 35% है — सिर्फ यही एक आदत आधी लड़ाई जिता देती है। ऑटो-पे लगाना सबसे आसान उपाय है।

क्रेडिट यूटिलाइजेशन 30% से नीचे रखें

अगर कार्ड की लिमिट ₹1 लाख है तो ₹30,000 से ज्यादा इस्तेमाल न करें — ज्यादा इस्तेमाल "पैसे की तंगी" का संकेत देता है। लिमिट बढ़वाना भी एक तरीका है, बशर्ते खर्च न बढ़े। कम इस्तेमाल, समय पर पूरा भुगतान — यही क्रेडिट कार्ड का सुनहरा नियम है। मिनिमम पेमेंट की आदत से बचें।

अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियां जांचें

साल में एक बार CIBIL या अन्य ब्यूरो से फ्री रिपोर्ट निकालकर देखें। गलत लोन एंट्री या किसी और का डिफॉल्ट आपके नाम पर दिख सकता है — ऐसा होता है। रिपोर्ट में गलती दिखे तो तुरंत डिस्प्यूट दर्ज करें — सुधरी रिपोर्ट सीधे स्कोर बढ़ाती है। यह मुफ्त है और हर किसी का हक है।

बार-बार लोन अप्लाई न करें

हर लोन या कार्ड एप्लीकेशन पर "हार्ड इन्क्वायरी" होती है जो स्कोर थोड़ा घटाती है। कम समय में कई अप्लीकेशन बैंक को हताश उधारकर्ता जैसा लगती हैं। एक बार में एक ही अप्लीकेशन करें और 3–6 महीने का गैप रखें — धैर्य स्कोर की रक्षा करता है। पहले एलिजिबिलिटी चेक करें।

पुराने अकाउंट बंद न करें

पुराना क्रेडिट कार्ड बंद करने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री छोटी हो जाती है और उपलब्ध लिमिट घटती है — दोनों स्कोर के लिए नुकसानदेह। सालाना फीस वाला कार्ड न चाहिए तो फ्री कार्ड में बदलवाएं। लंबी, साफ-सुथरी क्रेडिट हिस्ट्री स्कोर का खामोश दोस्त है — इसे संभालकर रखें। धैर्य रखें, स्कोर 3–6 महीने में सुधरता है।