धूल, धुआँ और प्रदूषण भरी हवा में साँस लेना सेहत के लिए खतरनाक है — खासकर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए। अच्छा एयर प्यूरीफायर घर की हवा को सच में साफ़ करता है। पर बाज़ार में दर्जनों मॉडल हैं — सही चुनाव के लिए ये 6 बातें जान लें।

HEPA फिल्टर है सबसे ज़रूरी

True HEPA (H13) फिल्टर 0.3 माइक्रोन तक के 99.97% कण पकड़ता है — धूल, पराग, धुआँ सब। "HEPA-type" या "HEPA-like" लिखे मॉडल से बचें — ये असली HEPA नहीं होते। प्री-फिल्टर और एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर गंध और गैसों के लिए बोनस हैं।

CADR: कमरे के हिसाब से पावर

CADR बताता है कि प्यूरीफायर कितनी तेज़ी से हवा साफ़ करता है। नियम सरल है — CADR (m³/h) आपके कमरे के आयतन का कम से कम 2-3 गुना होना चाहिए। 150 वर्ग फुट के कमरे के लिए 250+ CADR वाला मॉडल लें। छोटा प्यूरीफायर बड़े कमरे में बेकार है।

फिल्टर बदलने का खर्च गिनें

प्यूरीफायर की असली कीमत फिल्टर में छिपी होती है — हर 6-12 महीने में 2,000 से 5,000 रुपये। खरीदने से पहले फिल्टर की कीमत और उपलब्धता ज़रूर चेक करें। सस्ता प्यूरीफायर महंगे फिल्टर के साथ लंबे में महंगा पड़ता है।

शोर का स्तर चेक करें

प्यूरीफायर बेडरूम में रात भर चलेगा, इसलिए शोर मायने रखता है। स्लीप मोड में 25-30 डेसिबल से कम शोर वाला मॉडल चुनें — यह फुसफुसाहट जितना होता है। हाई स्पीड पर शोर बढ़ता है, पर वह सिर्फ कुछ मिनट के लिए चाहिए।

स्मार्ट फीचर्स: ज़रूरत या दिखावा

एयर क्वालिटी सेंसर और ऑटो मोड वाकई काम के हैं — प्रदूषण बढ़ने पर प्यूरीफायर खुद तेज़ हो जाता है। ऐप कंट्रोल और वॉइस असिस्टेंट बोनस हैं। सेंसर वाला मॉडल लें, बाकी फीचर्स बजट के हिसाब से तय करें।

सही इस्तेमाल के टिप्स

प्यूरीफायर को दीवार से थोड़ी दूरी पर, खुले स्थान पर रखें। खिड़कियाँ बंद रखकर चलाएँ — नहीं तो बाहर की गंदी हवा आती रहेगी। फिल्टर समय पर बदलें, वरना प्यूरीफायर सिर्फ़ शोर करने वाला पंखा बन जाएगा।